aaj_ke_jawan_20_11_2017

आज के जवान

“हे जवान, अपनी जवानी मेँ आनन्द कर, और अपनी जवानी के दिनोँ मेँ मगन रह; अपनी मनमानी कर और अपनी आँखोँ की दृष्टि के अनुसार चल परन्तु यह जान रख कि इन सब बातोँ के विषय परमेश्वर् तेरा न्याय करेगा।

अपने मन से खेद और अपनी देह से दुःख दूर कर, क्योँकि लडकपन और जवानी दोनो व्यर्थ है” ।

“अपनी जवानी के दिनोँ मेँ अपने सृजनहार को स्मरण रख, इस से पहिले विपत्ति के दिन और वे वर्ष आएँ, जिन मेँ तू कहे कि मेरा मन इन मेँ नही लगता” । – सभोपदेशक 11:9-10; 12:1.

आइए हम प्रार्थना करेँ: “है पीता परमेश्वर आज इस् वचन पर आपकि आशिश चाहते हैँ, जो ही पढे आज इस वचन को उसके जीवन मे ये सो गुनाह फल आये। यीशु मसिह के मधूर नाम मे आमिन।

“भाई और बहन आज का ये वचन  न केवल जवान बच्छे से बात कर्ता है, बल्कि हर एक इंसान से बात् कर रहा है। क्योंकि जब तक इंसान जिन्दा रहता है, वो अपनी जिन्दगि को अपने ढंग से जीना चाहता है। चाहे वो कोइ विश्वासि ही क्योँ न हो या प्रभु का दास्। और परमेश्वर ने हर एक को आजाद मर्जि भी दी है। इंसान जो कुछ भी चाहे करे, अपने जीवन मे एक न एक दिन जो जो उसने किया है उन सब का सामना करना होगा, यहाँ भी दूनिया मे जो कुछ इंसान बोता है, वो काट्ना पडता है उसे और इस दूनिया से जाने के बाद भी। ये परमेश्वर का प्रेम है कि वो इस वचन के द्धारा हर एक को चेतावनि दे रहे हैँ। भाई और बहन ये समय् है परमेश्वर के अनुग्रह का। हाल्लेलुयाह। परमेश्वर के अनुग्रह समय चल रहा है, जिसकि अंत नहि, आमिन। दूनिया मे हर एक को अपने जवानी के दिन याद पसन्द आते हैँ, कोइ भी पुराना नहि होना चाहता। ये वो समय होता है, जब इंसान शारिरिक तौर पर मजबूत होता है और मन मे जोस होता है, और जीवन मे कुछ कर गुजारने के सपने। इसलिए जो सही ढंग से अपनी जीवन को चलाते हैँ वो उस मुकाम को पा भी लेते हैँ, लेकिन जो सहि ढंग से और सहि निर्देश मे नहि चलते वो लोग जवान होने के बाद ज्यादा परेशानि मे पढने लग गये हैँ। आज कल किसि को पढाइ कि चिंता, बहूत सारा पैसा चाहिए सबको, जीन्दगी मे कुछ बन्ने कि चिंता, किसि को शादि कि चिंता और किसि को अपने लडकी दोस्त को खूश रखने कि चिंता। सहि कहा न मैने ? परमेश्वर चाहता है कि, उसके बच्छे हमेशा खूश रहे। पवित्र शास्त्र केह्ता है : “वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थोँ से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाई नई हो जाती है”। – भजन सहिंता 103:5, ऐसा वचन मे कहीँ नही लिखा कि तुम खूश न रहो, हमे धर्म का काम नहि करना है, बहूत सारे लोग धर्म मे जीते हैँ, नियम कि लम्बि लिस्ट दे देते हैँ और बहुत सारे जवान लोग तो ये समझते हैँ कि परमेश्वर के राह पर चल के वो खूश नहि रह पायेंगे, उनको अपनी खूशियाँ कि कुरबानि देनि होगी इसलिए वो अपनी ईच्छा खुद बना लेते हैँ।  वैसे भी भाई और बहन पचीश (25) साल तक इंसान का बचपन समय गिना गया है, इस आयु मे किसी को फिकर नही होनी चाहिये, खूशि रेहना है, जैसे फूल होते हैँ, फूल को देख के सब खूश होते हैँ, इस तरह इस जहाँ के युवा लोग हैँ। मैँ आपको बताना चाहता हूँ कि, क्योँ जवान लोग चिंता परेशानि मे पढ जाते हैँ? भाई और बहन सोलोमन एक राजा था दाऊद का पूत्र, जिसने ये सभोपदेशक किताब लिखि है। सोलोमन दूनिया का सबसे बुद्धीमान इंसान था ये उसको परमेश्वर कि तरफ से तौफा था। सोलोमन ने इंसान जीन्दगी को बहूत करीब से जाना समझा और देखा है और उसिका नतिजा है उसने तीन किताबेँ लिखीँ जो आम इंसान समझ नही पाते और कइ लोग तो गलत अर्थ भी निकाल लेते हैँ। वचन मे लिखा है “जवान अपनी जवानी मे खूश रह मगन रह..जवान लोग अपने दोस्त कि मंडली मे खूश रहते हैँ…क्योँकि वहाँ वो जो चाहे बोलते हैँ, घर आते ही वो माता पीता के सामने गँभीर हो जाते हैँ। कई जवान लोग अपनी खूशी मे इतने मगन हो जाते है की, घर के हालातोँ से कोइ मतलब नही रेहता। उन्हे पैसे चाहिये ताकि वो उन पैसे से अपनी खूसी खरीद सके। जो जवान लोग आजाद रेहना चाहते हैँ.. बहुत सारा जिन्हे पैसा चाहिये… सुन्दर लडकि दोस्त या लडका दोस्त चाहिये… वो हि लोग सैतान कि हित सूची मे आ जाते हैँ। पवित्र शाश्त्र मे यहि लिखा है कि जो चाहे जवान करे, जो दिल मे आये करे जैस जीना चाहता है जिये… लेकिन जिस दिन वो परमेश्वर विचार मे खडा होगा, उसे हर काम का हर बात का हिसाब परमेश्वर को देना होगा। सैतान भी हर एक बच्छे और् जवान के पिछे है, सैतान तरह – तरह के विचार उनके मनो मे डालता है,,,उनके मन से खेल खेलता है। मेरे भाई और बहन ये कोइ न सोचे कि परमेश्वर आपसे आपके जवानी के दिन लेके आपको बुढापे कि तरह ले जाता है.. नहि ऐसा नहि बिलकुल… ये धोका है जो सैतान ने सबको धोके मे रखा है। परमेश्वर अनुमति देता है कि, हर जवान खुश रहे लेकिन उनकि खुशी पाने कि रास्ते सहि करने होंगे बस। न्याय मे सबको खडा होना होगा जो लोग बुढापे मे हैँ लेकिन अलग उन्होने अपने जवानी के दिनो मे जो जो किया उसका हिसाब उनको भी देना पडेगा, चाहे कोइ इस वक़्त जवान है, बच्छा है, या बुढा है और ईंसान पाप मे ही जनम लेता है न पाप उसके खून मे है। जब तक कि खून से कोइ धोया ना हो जाये वो पापि कि सनतान ही रहता है। जो पाप उनके निडर बसा हुआ है, वहि उनहे पाप भरे रास्तोँ पर ले जाता है – “जवानी की अभिलाषाओँ से भाग ; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैँ, उनके साथ धार्मिकता, और विश्वस, और प्रेम, और मेल – मिलाप का पीछा कर।“ – 2 तीमुथियुस 2:22, मेरे भाई और बहन अगर एक जवान प्रभु यीशु के खून से धोया गया है और प्रभु ने उसका हृदय, आत्मा मन सबको यीशु के खून से धोया है तो, उनके विचार उनका उठना बैठना बदल जाते है, क्योंकि जवान लोग शराब पीना चाहते हैँ, बहूत सारे लोग चरित्र के खराब हो जाते हैँ, क्योंकि सोते उठते, बैठते उनका मन मे गन्दि सोचेँ आति है, जैसे जैसे जवान लोग सोचते हैँ, उनको ये चाहिये वो चाहिये, कई लोग माता पीता से झगडा करके पैसे लेते हैँ फिर उस पैसे को गलत कामो मे उजाढ देते हैँ । सैतान हर एक जवान बच्छे के मन से बात करता है, उसके मन मे बगावत के बीज बो देता है, उसके मन मे शारिरिक अभिलषा भर देता है। एक तो जब बच्छे पैदा होते हैँ, उनको जो जो शिक्षा अपने माता – पीता से मिलति है, वो उसि तरिके से आगे बढते हैँ। जैसा बीज बोया जाता है उनके जीवोनो मे वहि आगे फल लाता है। वचन कहता है लड्के को उसि मार्ग कि शिक्षा दे जिसमे उसको चलना चाहिये। हमारि पहला स्कूल हमारा अपना घर है, माता – पीता अगर बच्छे के लिये अच्छे उद्धाह्रण नहि पेस करते तो वो अपने बच्छोँ के लिये सहि नहि करते। “हे मेरे पुत्रोँ, पिता की शिक्षा सुनो, और समझ प्राप्त करने मेँ मन लगाओ”। – नितिवचन 4:1 । बहूत सारे जवान बच्छे घरो मे जो कुछ होता है वहि मनो मे लिये घुस्से, क्रोध, कढ्वाहट से भरे रहते हैँ, और् वहि वो आगे फैलाते जाते हैँ, शैतान जवान के मन मे डालता है कि वो इतना खूबसुरत नहि है, तो वो हर कोशिश करता है कि मैँ किसि तरह खूबसुरत लगूँ, लड्कियोँ के मन मे भी यहि आता है। शैतान अपने हर तमन्ना को पुरि करने के लिये जवानो को अपने नियंत्रन मे कर लेता है, उनको मनो से बात करता है, उनकि शरिर को नियंत्रन करता है, और् वो अपने चरित्र खराब कर लेते हैँ, शैतान उन्हे जुआ, खैनि , ड्रग्स खाने के लिये जवान के मन मे डालता है। जिन जवानो को पैसे चाहिये, शैतान उनको पैसे के लालच मे अपने नियंत्रन मे कर लेता है और ऐसे लोग पैसे के लिये कुछ भी करने को तेयार् हो जाते हैँ। जवान बस आगे मे हे अगर किसि भी जवान से बात करो तो पता चलता हे कि, वो लोग कितने डिप्रेशन से गूज़र रहे होते हैँ। उनके मनो मे हीन भावना होति है, कुछ जवान अपने आप को असफलता समझने लगते हैँ, और कुछ जवान असफलता को सम्भालना नहि कर पाते और अपनि ज़िन्दगि का अंत कर देते हैँ, और सदा के लिये नरख मे चले जाते हैँ। मरे भाई और बहन एक जवान उस बेल कि तरह होता है जो नये पौधे से निकल्ति है, उसे सहि दिसा मे लगाया जाये तो जल्दि बढ्ति है और दिखने मे सुन्दर लगति है। हमारे समाज के जवान गलत दिसा मे इस्लिये जा रहे हैँ क्योंकि उनको सहि मार्ग्दर्शन देने वाला कम लोग हैँ। घरोँ मे जीवन व्यस्त होने के कारण उनके सवालोँ के जवाब कोइ नहि देता। उनको लोग नहि समझते जो चाहे वो अपनि जीवन मे कर सकता है, इसे बिगाडे या सँवारे, सायद कुछ लोग को पता नहि की ये जिन्दगी परमेश्वर की दि हुइ है और इसपर परमेश्वर का अधिकार है। परमेश्वर हमारे अन्दर रहना चाहता है, हमारा शरिर परमेश्वर का मन्दिर है। परमेश्वर के राज्य मे सब जवान होंगे, वहाँ कोई जवान बच्छा या बुढा नहि होगा, वहाँ सब एक जैसे होँगे । “क्योंकि जी उठने पर विवाह – शादी न होगी; परन्तु वे स्वर्ग मेँ दूतोँ के समान होँगे। – मत्ति 22:30 । हाल्लेल्लुया, दुनिया मे ये जो हमारा डेरा है इसमे ह्म अपने शरीरोँ को परमेश्वर के हाथ मे देना है, अपने हृदय आत्मा मन देह को, जो बच्छे जवान यीशु मे जीवन बिताते हैँ वो अपनि जीवन को ज्यादा आनन्द करते हैँ, वो गुलामि मे नहि जीते उनके अन्दर आजादि और खुसि हर्ष होता है जो परमेश्वर उन्हे देता है। जो लोग अपनि मर्जि से जीते हैँ, वचन के अनुसार नहि जीते, अपने शरिरोँ अपवित्र कर देते हैँ, ऐसा समय आता है कि वो निराशा मे जीने लगेंगे, कुछ लोग बिमारियोँ का शिकार हो जाते हैँ। कुछ सदा के लिये अन्धकार को हि अपना लेते हैँ, और शैतान उन पर राज करता है। हालाकि वो उस जीवन से खुश नहि होते लेकिन उन्हे मजबूर जीना पढ्ता है। “जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन का पालन करने से”। भजन सहिंता 119:9 “कोई तेरी जवानी को तुच्छ् न समझने पाए ; पर वचन, चाल चलन, प्रेम, विश्वस, और पवित्रता मेँ विश्वासियोँ के लिये आदर्श बन जा”। 1 तीमुथियुस 4:12 । मेरे प्यारे भाई और बहन आज ही वो समय है कि सब अपने आपको परीक्षा करेँ जांचे और प्रभु के चरनो मे आ जायेँ तौबा करेँ और परमेश्वर को अपनी जीवन मे काम करने देँ। आज के वचन के द्धारा पिता परमेश्वर आपको बहूत आशीश दे। प्रभु यीशु के मिठे नाम मे “आमेन”

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1. Those (Men and Women) who are doing the Lord’s Ministry on full time basis or involved in the Ministry or desirous of doing the Ministry according to Gods call.

2. If you desire to be Ordained by FLM, then, Send 2 Letters, recommending your Ordination, from Pastors or Evangelists or Christian Leaders of which one Letter preferably from your Pastor.

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THINGS TO PRAY FOR

प्रार्थना

1. OURSELVES – अपने लिए –

अब्राहम का दास अपने कार्य को सिद्ध करने के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करता है:- “उसने कहा, “हे यहोवा, मेरे स्वामी इब्राहीम के परमेश्वर, आज मेरा कार्य सफल कर, और मेरे स्वामी इब्राहीम पर कृपा-दृष्टि कर।” – उत्पत्ति 24:12

जब पतरस पानी मे डुबने लगा तो अपने लिए प्रार्थना कर रहा है:- “….और पतरस नाव से उतरकर पानी पर चलता हुआ यीशु की ओर बढ़ा। परन्तु हवा को देखकर वह डर गया और डूबने लगा तो चिल्लाया, “प्रभु, मुझे बचा!” – मत्ती 14:30

क्रूस पर कुकर्मि, यीशु मसिह से अपने लिए प्रार्थना कर रहा है:- ” तब उसने कहा, “यीशु, जब तू अपने राज्य में आए तो मुझे स्मरण करना!” – लूका 23:42

2. ONE ANOTHER – ऎक़ दूसरे के लिए-

“इसलिए तुम परस्पर अपने पापों को मान लो और एक दूसरे के लिए प्रार्थना करो, जिससे कि चंगाई प्राप्त हो। धर्मी जन की प्रभावशाली प्रार्थना में बहुत कुछ हो सकता है।” – याकूब 5:16

पौलुस रोम को केहता है कि मैँँ तुम्हेँ किस प्रकार लगातार स्मरण करता रहता हूँ :- ” क्योंकि परमेशवर, जिसकी सेवा मैं अपनी आत्मा में उसके पुत्र के सुसमाचार-प्रचार में करता हूँ, मेरा साक्षी है कि मैं तुम्हें किस प्रकार निरन्तर स्मरण करता हूँ, ” – रोमियो 1:9

3. Pastor – चरवाहे (पासवान) के लिए –

पौलुस इफिसियोँ को अपने लिए प्रार्थना करने के लिए कहता है:- “और मेरे लिए भी प्रार्थना करो कि बोलते समय मुझे ऐसा प्रबल वचन दिया जाए कि मैं साहस से सुसमाचार के रहस्य को प्रकट कर सकूं, जिसके लिए मैं जंजीर से जकड़ा हुआ राजदूत हू। प्रार्थना करो कि जैसा मुझे बोलना चाहिए, मैं साहस से बोल सकू।” – इफिसियों 6:19-20

“प्रार्थना में लगे रहो। धन्यवादपूर्वक प्रार्थना में जागृत रहो।  इसके साथ ही हमारे लिए भी प्रार्थना करते रहो कि परमेशवर हमारे लिए वचन सुनाने का ऐसा द्वार खोल दे कि हम मसीह के उस रहस्य का वर्णन कर सकें जिसके कारण मैं बन्दी भी बनाया गया हूं,” – कुलुस्सियों 4:2-3

4. SICK BELIEVERS – दुर्बल विश्वसीयोँ के लिए-

“क्या तुम में कोई रोगी है? यदि है तो कलीसिया के प्राचीनों को बुलाए और वे उस पर तेल मल कर प्रभु के नाम से उसके लिए प्रार्थना करें, और विशवासपूर्ण प्रार्थना के द्वारा रोगी चंगा हो जाएगा और प्रभु उसे उठा खड़ा करेगा; और यदि उसने पाप किए हों तो वे भी क्षमा कर दिए जाएंगे।” – याकूब 5:14-15

5. RULERS – ऊँचे पदवालो के लिए-

“अब सब से पहिले मेरा अनुरोध यह है कि विनतियां और प्रार्थनाएं, निवेदन तथा धन्यवाद सब मनुष्यों के लिए अर्पित किए जाएं, विशेज रूप से राजाओं और सब पदाधिकारियों के लिए, जिससे कि हम चैन और शान्ति सहित, पूर्ण भक्ति तथा गम्भीरता के साथ जीवन व्यतीत कर सके। यह हमारे उद्धारकर्ता परमेशवर की दृष्टि में भला और ग्रहणयोग्य है,” -1 तीमुथियुस 2:1-3

6. OUR ENEMIES – शत्रुओँ के लिए –

“परन्तु मैं तुमसे कहता हूँ, अपने शत्रुओं से प्रेम करो और जो तुम्हें सताते हैं, उनके लिए प्रार्थना करो ” मत्ती 5:44

“जब वे पथराव कर रहे थे तो स्तिफनुस ने प्रार्थना की, ‘‘हे प्रभु, मेरी आत्मा को ग्रहण कर!” और अपने घुटनों के बल गिरकर वह ज़ोर से चिल्लाया, ‘‘प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा!” यह कहकर वह सो गया।” – प्रेरितों के काम 7:59-60

7. ISRAEL – इस्राएल के लिए-

” यरूशलेम की शान्ति के लिए प्रार्थना करोः “तेरे प्रेमी कुशल से रहे। “- भजन संहिता 122:6

“हे यरूशलेम, मैंने तेरी शहरपनाह पर पहरेदार नियुक्त किए हैं; वे दिन-रात कभी चुप न बैठेंगे। हे यहोवा को स्मरण दिलाने वालो, तुम शान्त न रहना और जब तक वह यरूशलेम को स्थिर करके पृथ्वी पर उसकी प्रशंसा न फैलाए तब तक उसे भी शान्त न रहने देना।” – यशायाह 62:6-7

8. ALL MEN – सभी लोग के लिए –

” अब सब से पहिले मेरा अनुरोध यह है कि विनतियां और प्रार्थनाएं, निवेदन तथा धन्यवाद सब मनुष्यों के लिए अर्पित किए जाएं, ” – 1 तीमुथियुस 2:1

Question about JESUS

यीशु के बारे मे खूद पर प्रश्न ?

प्रश्न 1. क्या हमे यीशु मे विश्वास करना ही है ?

हाँ हमे करना ही है । क्योंकि स्वर्ग और मनुष्य मे कोई दुसरा नाम नही जो हमे बचा सकता है । – प्रेरितो के काम 4:12

क् ) क्योंकि वह हमारा स्वामी है,

ख) क्योंकि वह सबसे धार्मिकता है,

ग) क्योंकि यह उसकी इच्छा है,

घ) क्योंकि और कोई उद्दारकर्ता नहि है,

ङ) क्योंकि यीशु ही हमारा रक्षक है,

च) क्योंकि हम उसमे विश्वास करके ही मुक्त हो सकते हैँ । और पुनर्जन्म ले सकते हैँ।

छ) क्योंकि उसमे विश्वास करके ही हम स्वर्ग जा सकते हैँ और वहाँ अनंत काल तक रह सकते हैँ ।

प्रश्न 2. हम् यीशु मे विश्वास क्योँ करे ?

हमे यीशु मे इसलिए विश्वास करना होगा:-

1) ईश्वर की इच्छा को पुरा करने के लिए ।

दाऊद केहता है – मुझ को सिखा कि मैँ तेरी इच्छा कैसे पुरी करूँ । – भजन संहिता 143:10

यीशु केहता है:- क्‍योंकि मैं अपनी इच्‍छा नहीं, बल्‍कि जिसने मुझे भेजा, उसकी इच्‍छा पूरी करने के लिए स्‍वर्ग से उतरा हूँ। – यूह्न्ना 6:23

तब मैंने कहा, ‘हे परमेशवर, देख, मैं तेरी इच्छा पूरी करने आ गया हूं-पुस्तक में मेरे विजय यही लिखा हुआ है’।” – इब्रानियों 10:7

हम जानते हैं कि जो लोग परमेश्‍वर से प्रेम करते हैं और उसके उद्देश्‍य के अनुसार बुलाये गये हैं, परमेश्‍वर उनके कल्‍याण के लिए सभी बातों में उनकी सहायता करता है । – रोमियो 8:28

परमेश्वर कि इच्छा पुरी करने के लिए अन्य लोग सचेत होकर शैतान के फन्दे से छुट जाए।

और सचेत हो कर *शैतान के फन्दे से बच निकलें, जिसने उन्हें अपनी इच्छा पूर्ण करने के लिए बन्दी बना रखा है। – 2 तीमुथियुस 2:26

तुम्हें सब भले गुणों से परिपूर्ण करे, जिस से तुम उसकी इच्छा पूरी करो, और जो कुछ उसकी दृष्टि में प्रिय है, वह यीशु मसीह के द्वारा हमारे अन्दर पूरा करे। उसी की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन। – इब्रानियों 13:21

कि अपने मध्य स्थित परमेशवर के झुंड की रखवाली करो-और यह किसी दबाव से नहीं, पर स्वेच्छा से तथा परमेशवर की इच्छा के अनुसार, तुच्छ कमाई के लिए नहीं वरन् उत्साहपूर्वक करो।

जो लोग तुम्हें सौंपे गए हैं, उन पर प्रभुता न जताओ, परन्तु अपने झुण्ड के लिए आदर्श बनो। – 1 पतरस 5:2-3

2) हमारे सारे पापोँँ से बचने के लिए :-

पाप को ग्रीक मे- हैमर्शिया कहते हैँ ।

और पाप करना – हैमरतानो कहलाता है : जिसका अर्थ है- लक्ष्य से चूक जाना ।

यूहन्ना कहता है-
दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, “देखो, परमेशवर का मेमना जो जगत का पाप उठा ले जाता है। – यूहन्ना 1:29

परन्तु वह जो सन्देह कर के खाता है, वह दोषी ठहर चुका, क्योंकि वह विशवास से नहीं खाता; और जो कुछ विशवास से नहीं, वह पाप है। – रोमियो 14:23

जो पाप से अनजान था, उसी को उसने हमारे लिए पाप ठहराया कि हम उसमें परमेशवर की धार्मिकता बन जाए। – 2 कुरिन्थियों 5:21

तेरे वचन को मैंने अपने हृदय में संचित किया है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करू। – भजन संहिता 119:11

3) मुक्त होकर ईश्वर के सम्राज्य मे प्रवेश करने के लिए, जिस्से हम प्रभू के पास हमेशा रह सके ।

यीशु कहता है-
हे पिता, मैं चाहता हूँ कि जिन्हें तूने मुझे दिया है, जहाँ मैं हूँ, वहां वे भी मेरे साथ रहें, कि वे मेरी उस महिमा को देख सकें जिसे तूने मुझे दी है, क्योंकि तूने जगत की उत्पत्ति से पहिले मुझसे प्रेम किया। – यूहन्ना 17:24

चोर (कुकर्मी) स्वर्ग मे प्रवेश करने के लिए क्रुस पर से यीशु को प्रार्थना करना –

तब उसने कहा, “यीशु, जब तू अपने राज्य में आए तो मुझे स्मरण करना!”उसने उससे कहा, “मैं तुझसे सच कहता हूँ कि आज ही तू मेरे साथ स्वर्गलोक में होगा।” – लूका 23:42-43

प्रश्न 3. क्या हम यीशु मे विश्वास करके भी पापी हो सकते हैँ ?

उत्तर:- नही ।

पौलुस कहता है- जब वह यीशु से नही मिला था, माना कि वह प्रमुख पापी था ।

यह एक विशवसनीय और हर प्रकार से ग्रहणयोग्य बात है कि मसीह यीशु संसार में पापियों का उद्धार करने आया-जिनमें सब से बड़ा मैं हू। – 1 तीमुथियुस 1:15

अतः हम जो मसीह में धर्मी ठहराए जाने की खोज कर रहे हैं, यदि स्वयं ही पापी निकलें तो क्या मसीह पाप का सेवक है? कदापि नहीं! जिसको मैं एक बार नष्ट कर चुका हूं, यदि उसे फिर बनाता हूं तो स्वयं को अपराधी प्रमाणित करता हू। -गलातियों 2:17-18

प्रश्न 4. यीशु को सलीब पर क्योँ मरना पडा ?

यीशु को सलीब पर मनुष्य् के पापोँ का मूल्य चुकाने के लिए मरना पडा ।

मैंने यह बात जो मुझ तक पहुंची थी उसे सब से मुख्य जानकर तुम तक भी पहुंचा दी, कि पवित्रशास्त्र के अनुसार मसीह हमारे पापों के लिए मरा, – 1 कुरिन्थियों 15:3

क्योंकि तुम मूल्य देकर खरीदे गए होः इसलिए अपने शरीर के द्वारा परमेशवर की महिमा करो। -1 कुरिन्थियों 6:20

प्रश्न 5. यीशु मेँ विश्वास करके हमे क्या मिलता है ?

1. हम अपने पापोँ से मुक्त होकर सदाचारी (धार्मीक) बन जाते हैँ ।

अतः अब उन पर जो मसीह यीशु में हैं, दण्ड की आज्ञा नही।

क्योंकि जीवन के आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में *तुम्हें पाप और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतन्त्र कर दिया है। -रोमियो 8:1-2

2. हमेँ उसकी आत्मा और अमर जीवन मिलता है ।

पतरस ने उनसे कहा, ‘‘मन फिराओ और यीशु मसीह के नाम से तुम में से प्रत्येक बपतिस्मा ले कि तुम्हारे पापों की क्षमा हो, और तुम पवित्र आत्मा का वरदान पाओगे। – प्रेरितों के काम 2:38

वह साक्षी यह है कि परमेश्वर ने हमें अनन्त जीवन दिया है, और यह जीवन उसके पुत्र में है। जिसके पास पुत्र है उसके पास जीवन है; जिसके पास परमेश्वर का पुत्र नहीं उसके पास वह जीवन भी नही। – 1 यूहन्ना 5:11-12

3. हमेँ ईश्वर के बच्चे बन जाने का अधिकार मिलता है।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेशवर की सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात् उन्हें जो उसके नाम पर विशवास करते हैं – यूहन्ना 1:12

4. हम ईश्वर के साम्राज्य स्वर्ग मे प्रवेश करते हैँ ।

स्वर्ग मेँ- परन्तु कोई भी अपवित्र वस्तु या कोई घृणित कार्य अथवा झूठ पर आचरण करने वाला उसमें प्रवेश न करेगा, परन्तु केवल वे जिनके नाम मेमने के जीवन की पुस्तक में लिखे है। – प्रकाशित वाक्य 21:27

5. हमे ईश्वर का पूरा आशीर्वाद मिलता है ।

पौलुस की ओर से जो परमेशवर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, इफिसुस निवासी उन पवित्र लोगों को जो मसीह यीशु में विशवासी हैः हमारे पिता परमेशवर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और -शान्ति मिले। हमारे प्रभु यीशु मसीह का पिता परमेशवर धन्य हो, जिसने हमें मसीह में स्वर्गीय स्थानों में सब प्रकार की आत्मिक आशिशों से आशिशित किया है। उसने हमें जगत की उत्पत्ति से पूर्व मसीह में चुन लिया कि हम उसके समक्ष प्रेम में पवित्र और निर्दोष हो। उसने हमें अपनी इच्छा के भले अभिप्राय के अनुसार पहिले से ही अपने लिए यीशु मसीह के द्वारा लेपालक पुत्र होने के लिए ठहराया, कि उसके उस अनुग्रह की महिमा की स्तुति हो जिसे उसने हमें उस अति प्रिय में सेंतमेंत दिया। हमें, उसमें, उसके लहू के द्वारा छुटकारा, अर्थात् हमारे अपराधों की क्षमा, उसके अनुग्रह केे धन के अनुसार मिली है, जिसे उसने समस्त ज्ञान और समझ से हमें बहुतायत से दिया है।उसने हमें अपनी इच्छा का रहस्य अपने भले अभिप्राय के अनुसार जिसे उसने स्वयं निर्धारित किया था, बताया-ऐसे प्रबन्ध के उद्देशय से कि समयों के पूरे होने पर वह सब कुछ जो स्वर्ग और पृथ्वी पर है, मसीह में एकत्रित करे। उसी में जो अपनी इच्छा की सुमति के अनुसार सब कुछ करता है , हमने भी उसके अभिप्राय के अनुसार, पहिले से ठहराए जाकर, *उत्तराधिकार प्राप्त किया है, कि हम, जिन्होंने मसीह पर पहिले से आशा रखी थी, उसकी महिमा की स्तुति के कारण हो। उसी में तुम पर भी, जब तुमने सत्य का वचन सुना जो तुम्हारे उद्धार का सुसमाचार है-और जिस पर तुमने विशवास किया-प्रतिज्ञा किए हुए पवित्र आत्मा की छाप लगी।वह हमारे उत्तराधिकार के बयाने के रूप में इस उद्देशय से दिया गया है कि परमेशवर के मोल लिए हुओं का छुटकारा हो, जिस से परमेशवर की महिमा की स्तुति हो। इस कारण मैं भी तुम्हारे उस विशवास का समाचार सुनकर जो प्रभु यीशु में है और तुम्हारा प्रेम जो सब पवित्र लोगों के प्रति है, तुम्हारे लिए निरन्तर धन्यवाद देता हूं और अपनी प्रार्थनाओं में तुम्हें स्मरण किया करता हूं,कि हमारे प्रभु यीशु मसीह का परमेशवर, जो महिमा का पिता है, तुम्हें अपनी *पूर्ण पहिचान में ज्ञान और प्रकाशन की आत्मा दे।मैं प्रार्थना करता हूं कि तुम्हारे मन की आंखें ज्योतिर्मय हों, जिस से तुम जान सको कि उसकी बुलाहट की आशा क्या है, और पवित्र लोगों में उसके उत्तराधिकार की महिमा का धन क्या है,और उसका सामर्थ्य हम विशवास करने वालों के प्रति कितना महान् है। ये सब उसकी उस शक्ति के कार्य के अनुसार है, जिसे उसने मसीह में पूरा किया जब उसने उसे मरे हुओं में से जिलाकर अपनी दाहिनी ओर स्वर्गीय स्थानों में, अर्थात् सब प्रकार की प्रधानता, अधिकार, सामर्थ्य और प्रभुता के, तथा प्रत्येक नाम के ऊपर, जो न केवल इस युग में , परन्तु आने वाले युग में भी लिया जाएगा, बैठाया।उसने सब कुछ उसके पैरों तले कर दिया और उसे सब वस्तुओं पर शिरोमणि ठहराकर कलीसिया को दे दिया,जो उसकी देह है, और उसकी परिपूर्णता है जो सब में सब कुछ पूर्ण करता है। -इफिसियों 1:3-23

“प्रभु आप सभि को आशीष देँ “।
अधिक जानकारी के लिए पवित्र शास्त्र पडे.


परमेश्वर हमें क्यों ठहराया है

परमेश्वर हमें क्यों ठहराया है ?

परमेश्वर हमें क्यों ठहराया है ?

तब उस ने कहा; हमारे बाप दादों के परमेश्वर ने तुझे इसलिये ठहराया है, कि तू उस की इच्छा को जाने, और उस धर्मी को देखे, और उसके मुंह से बातें सुने। ACT : 22:14.

१) उसकी इच्छा को जाने :-  तो परमेश्वर का इच्छा क्या है ?

१. परमेश्वर की इच्छा यह है की सब उद्धार पाए. MATTHEW 18:14

२. यीशु कहता है, परमेश्वर की इच्छा पूरी करने के लिए स्वर्ग से उतरा हूँ . JOHN 6:38

३. वो चाहता है, की हम उसकी इच्छा से मांगे. 1 JOHN 5:14

४. उसकी इच्छा यह है की हम पवित्र बने. 1 THESSALONIANS 4:3

) उस धर्मी को देखे:-  तो धर्मी कौन है ?

बाइबिल कहता है, कोई भी धर्मी नहीं. ROMAN 3:10

Example; GENESIS 18:23-33

लेकिन बाइबिल यह भी कहता है:- १.  व्यवस्था के सुनने वाले धर्मी नहीं, पर व्यवस्था पर चलने वाले धर्मी ठहराए जाएंगे। ROMAN 2:13

२. विश्वाश के द्वारा अब्राहम को धार्मिकता गिना गया  ROMAN 4:2,3

३. हम विश्वास से धर्मी ठहरे. ROMAN 5:1; GALATIANS 2:16,17

४. हम उसके लहू के कारन धर्मी ठहरे. ROMAN 5:9

५. धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा, हमें मसीह तक पहुँचाने के लिए व्यवस्था हमारा शिक्षक हुआ, की हम विश्वास से धर्मी ठहरे । GALATIANS 3:11,24

३) उसके मुँह से बातें सुने :-

१. यीशु कहता है :- मेरी भेड़े मेरा शब्द सुनती है।  JOHN 10:27

२. जो शिक्षा को सुनी – अनसुनी करता, वो अपने प्राण को तुच्छ जनता है. PROVERBS 15:32

३. भला होता की हम उसकी आवाज को सुनते. PSALM 95:7

४. जब हम उसकी आवाज को सुनेंगे तो हमे अपना मन को कठोर नहीं करना है. HEBREWS 3:7,8

और उसने कहा, ‘हमारे पूर्वजों के परमेशवर ने तुझे इसलिए नियुक्त किया है कि तू उसकी इच्छा को जाने, उस धर्मी को देखे और उसके मुख से बातें सुने।