Ressurrection 1

य़िशु का अपने चेलोँ का पावँ धोने के कार्य़ से पुनरुथान तक

यिशु का अपने चेलोँ का पावँ धोना

यीशु ने अपने चेलों के पाँव धोए :- “ यह पाँव धोने का दर्शनीय कार्य यीशु के पृथ्वी पर जीवन काल की अंतिम रात्रि को हुआ I यीशु ने इसे किया” I

  1. अपने शिष्यों को दर्शाने के लिये कि वह उनसे कितना प्रेम करता है I
  2. अपने क्रूस पर आत्म बलिदान को दर्शाने के लिये ; और
  3. यह सत्य प्रकट करने के लिये कि उसने अपने शिष्यों को दीन होकर एक दुसरे कि सेवा के लिये बुलाया है I

यीशु ने अपने चेलों के पाँव धोए :- “ यीशु अपने चेलों को मसीही सेवा की पंक्ति सिखाने के लिए पाँव धोने का नमूना दे रहा था” I

  1. सेवा प्रेम दिखाने का एक ढ़ंग (तरीका) है :- John : 13:1; 13:34,35,
  2. सेवा आत्मविश्वास से ही हो सकती है :- John : 13:2-4,
  3. सेवा से परमेश्वर कि और दिशा मिलती है :- John : 13:1-5,
  4. सेवा के लिए पहिले सेवा करना आवश्यक है :- John : 13:6-10,
  5. सेवा करने का अर्थ अनुसरण करना है :- John : 13:12-16,
  6. सेवा का अर्थ कुछ करना है :- John : 13:17 ; James 1:22.

विचार   (मुकदमा)

छ: बार यिशु का मुकदमा हुआ :-

  1. अवकाश प्राप्त महायाजक के सामने
  2. कर्मठ महायाजक के सामने
  3. यहूदी हाकिमो के सामने
  4. रोमी हाकिम् के सामने
  5. हेरोदेस राजा के सामने
  6. दुसरी बार् पीलातुस के सामने

क्रूस

सुबह 9 बजे यीशु को क्रूस पर लटकाय़ा गय़ा, शाम 3 बजे तक वह क्रूस पर हि था।

1. परमेश्वर क्रूस के द्वारा अपनी सामर्थ प्रकट करता है :- 1 Corinthians 1:18; Romans 1:16

2.  परमेश्वर क्रूस पर अपना प्रेम प्रकट करता है :- Romans 5:8

3.  उसने हमारे दुःखोँ को क्रूस पर मिटा दिय़ा :- Isaiah 53:4

4. य़ीशु ने क्रूस पर हमारे पापोँ के दण्ड को ले लिय़ा :- Isaiah 53:6; 1 Peter 2:24

5. हम क्रूस के द्वारा पापोँ की क्षमा पाते हैँ :- Colossians 1:13,14; 1 John 2:12

6. हम क्रूस के द्वारा परमेश्वर के परिवार के सदस्य़ बनते है :- Hebrews 2:11,12; John 1:12

7. क्रूस के द्वारा जातीय़ अवरोध (दाय़रे) निय़म तोडे गय़े :- Ephesians 2:13-16

क्रूस के द्वारा स्वतंत्रता

1. शैतान से स्वतंत्रता :- Colossians 2:15; 1:13

2. पूर्व पापोँ से स्वतंत्रता :- John 8:36; Colossians 2:13

3. वर्तमान पापोँ से स्वतंत्रता :- Romans 6:14

4. बिमारी से स्वतंत्रता :- Matthews 8:17

5. अभिषाप से स्वतंत्रता :- Galatians 3:13

6. न्य़ाय़ से स्वतंत्रता :- Hebrews 9:26,27

7. अनन्त मृत्य़ू से स्वतंत्रता :- John 3:16

क्रूस पर से सात वचन और सात द्वार

1. तब य़ीशु ने कहा, “है पिता, इन्हे क्षमा कर, क्य़ोंकि य़े जानते नहिँ कि क्य़ा कर रहे हैँ” :-

Luke 23:34

पहला द्वार् :- प्रकाश करता है कि वो क्षमादानकारी प्रभु है ।

2. उसने उस से कहा, “मैँ तुझ से सच कहता हूँ कि आज ही तु मेरे साथ स्वर्गलोक मे होगा” :-

Luke 23:43

 दुसरा द्वार् :- वो मन परिवर्तन पापि का उद्धारकारी प्रभु है ।

3. जब य़ीशु ने अपनि माता, और उसे चेले को जिससे वह प्रेम रखता था, पास खडे देखा तो अपनी माता से कहा, “है नारी देख, य़ह तेरा पुत्र है” :- John 19:26

तीसरा द्वार् :- वो सबका चरवाहकारी (पालन कारी) प्रभु है ।

4. तीसरे पहर के निकट य़ीशु ने बडे शब्द से पुकार कर कहा, “एली, एली, लमा शबकतनी, अर्थात, हे मेरे परमेश्वर हे मेरे परमेश्वर तू ने मुझे क्य़ोँ छोड दिय़ा” :- Mathews 27:46

चौथा द्वार् :- वो निष्पाप होते हुए भी परमेश्वर से अलग करने वाली पाप का दण्ड सहने हेतु-

पापि का पाप का प्राय़श्चितकारी प्रभु है ।

5. इसके बाद य़ीशु ने य़ह जान कर कि अब सब कुछ पुरा हो चुका, इसलिए कि पवित्र शास्त्र मेँ जो कहा गय़ा वह पुरा हो कहा, “मैँ प्य़ासा हूँ” :- John 19:28

पांचवि द्वार् :- वो पापिय़ोँ का उद्धार के लिए क्लेश सहनकारी प्रभु है ।

6. जब य़ीशु ने वह सिरका लिय़ा, तो कहा, “पूरा हुआ” और सिर झुका कर प्राण त्य़ाग दिए :-

John 19:30

छटवेँ द्वार् :- वो सम्पूर्ण परमेश्वर, सम्पूर्ण मनूष्य़ स्वरूप साधनकारी और सम्पूर्ण दानकारी प्रभु है ।

7. और य़ीशु ने बडे शब्द से पुकार कर कहा, “हे पिता मैँ अपनी आत्मा तेरे हाथोँ मेँ सौँपता हूँ”, और य़ह कहकर प्राण छोड दिए :- Luke 23:46

सातवीँ द्वार् :- वो पापि का फिर से मेल मिलापकारी य़ा उसको शांतीदानकारी प्रभु है ।

य़ीशु का भबिष्य़वाणी, समाधी और उसकी पूनरुथान :-

1. उसको भाले से बेधा जायेगा :- Zachariah 12:10;  John 19:34

2. एक भी हड्डी टूटेगा नहीँ :- Psalms 34:20; John 19:33

3. धनवानो के संग समाधी :- Isaiah 53:9; Mathew 28:9

4. उनका पूनरुथान :- Psalms 16:10; Mathew 28:9

5. य़ीशु भविष्य़वाणी की :- Mathew 17:22-23

सैनिकोँ मेँ से एक ने भाले से उसका पंजर बेधा :- John 19:34

समाधी

य़ीशु मरने के बाद कब्रे खुल गई :- Mathew 27:52

अरिमतिय़ा का य़ूसुफ और नीकूदेमुस द्वारा य़ीशु की लाश को दफनाय़ा गय़ा :- John 19:38-42

य़ाजकोँ और फरीसिय़ोँ ने पिलातुस से पुछ कर कब्र पर पहरुओँ को जगाय़ा :- Mathew 27:62-66

य़ीशु मरे हुए लोगोँ को (मुख्य़ स्थान) प्रचार किय़ा :- 1 Peter 3:19-20; 4:6

मरिय़म मगदलीनी और दुसरी मरिय़म कब्र पर गई :- Mathew 28:1-9; John 20:1-10; 24:1-12

पुनरुथान्

प्रेरितोँ ने स्त्रिय़ोँ कि बात पर “विश्वास नहीँ किय़ा”। य़ीशु की मृत्य़ु के समय़ किसी ने विश्वास नहीँ किय़ा था कि वह मुर्दोँ मेँ से जी उठा है, जिन्होँने उसे गाडा उन्हेँ भी विश्वास नहीँ था । बन्द दरवाजोँ के पीछे उसके चेलोँ को विश्वास नहीँ था । उसके शव पर सुगँधित वस्तुएँ लगाने के लिए आई स्त्रिय़ोँ को विश्वास नहीँ था । निश्चय़ ही उसके शत्रुओँ को विश्वास नहीँ था । “जी उठे प्रभु का पहला बडा काम अपने ही चेलोँ को विश्वास दिलाना था वह फिर जी उठा है ।

उसने दुःख उठाने के बाद बहुत से पक्के प्रमाणोँ से अपने आप को प्रेरितोँ दिखाइ देता रहा :- Act 1:3

सच मुच मसीह जि उठा है :- 1 Corinthians 15:20

इम्माऊस के मार्ग पर, चेलोँ (किलय़ोपास और उसके साथी) को य़ीशु दीखाई देना :- Mathew 24:13-34;

थोमा को दीखाई देना :- John 20:27-29

By Rev. Sunil Khilla

Forever Life Ministries

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